बुधवार, 25 सितंबर 2019

ऐसी आँख

ऐसी आँख कहाँ से दूँ
जो दृश्य नहीं उसका  सत्य दिखाए।
ऐसा कान कहाँ से दूँ
जो शब्द नहीं अर्थ सुनाए।
ऐसा मुँख कहाँ से दूँ
जो व्यर्थ न बोले कभी।
ऐसा हाथ कहाँ से दूँ
जो दूसरे की ज़रूरत समझ सके।
ऐसा सिर कहाँ से दूँ
जो झुका ही रहे सदा।
ऐसा कर्म कहाँ से दूँ
जो याद रहे सदा

(कुछ नहीं रखा है इसमें)
मनोज कुमार मिश्रा

मंगलवार, 23 जुलाई 2019

हुनर

धो दो कुछ गुनाह उनके,ताकि लिबास अपना शफ्फाक रहे।
हुनर है सदा से हमारा, क़ायनात पर ऐतबार करना।

शनिवार, 13 जुलाई 2019

प्रेम पत्र

प्रिय मंच,
मैं बहुत अच्छा हूँ और आप तो आप ही है। इस समय आपको तो फुरसत नही है मुझसे भी ज्यादा चाहनेवाले मिल गए है। आशा करता हूँ आपने जितना प्यार मुझे दिया इससे ज्यादा प्यार और सम्मान अन्य कलाकारों को भी मिलेगा।
आगे समाचार यह है कि कुछ दिनों के लिए आपसे दूर जाने की प्रबल इच्छा हो रही है। कारण खोजता हूँ तो मिलता ही नही है। कारण मिलते ही फिर आ जाऊंगा। तब तक के लिए पुनः साधनारत होना चाहता हूँ।
कैसे कहूँ......तुम्हारी हाँ के बिना मैं हिल भी नही सकता।
......……
प्रिय कुछ दिनों के लिए मुझे मुक्त नही कर सकते।
इसी आशा के साथ

बच्चे से थोड़ा बड़ा

बच्चे से थोड़ा बड़ा ही तो हूँ
40 की दहलीज़ पर खड़ा तो हूँ।
दम फूलता नही अभी तो दम भरता भी तो नही।
तुम्ही कहो गोद में खेलते बच्चे से थोड़ा छोटा ही तो हूँ

शनिवार, 22 जून 2019

खेत

खेत में पाला
बगल में नाला
घर में साला

शुक्रवार, 14 जून 2019

कमबख्त

वो तो कमबख्त है जब आती है।
न नींद आती है न याद आती है।।