शनिवार, 13 जुलाई 2019

प्रेम पत्र

प्रिय मंच,
मैं बहुत अच्छा हूँ और आप तो आप ही है। इस समय आपको तो फुरसत नही है मुझसे भी ज्यादा चाहनेवाले मिल गए है। आशा करता हूँ आपने जितना प्यार मुझे दिया इससे ज्यादा प्यार और सम्मान अन्य कलाकारों को भी मिलेगा।
आगे समाचार यह है कि कुछ दिनों के लिए आपसे दूर जाने की प्रबल इच्छा हो रही है। कारण खोजता हूँ तो मिलता ही नही है। कारण मिलते ही फिर आ जाऊंगा। तब तक के लिए पुनः साधनारत होना चाहता हूँ।
कैसे कहूँ......तुम्हारी हाँ के बिना मैं हिल भी नही सकता।
......……
प्रिय कुछ दिनों के लिए मुझे मुक्त नही कर सकते।
इसी आशा के साथ

बच्चे से थोड़ा बड़ा

बच्चे से थोड़ा बड़ा ही तो हूँ
40 की दहलीज़ पर खड़ा तो हूँ।
दम फूलता नही अभी तो दम भरता भी तो नही।
तुम्ही कहो गोद में खेलते बच्चे से थोड़ा छोटा ही तो हूँ

शनिवार, 22 जून 2019

खेत

खेत में पाला
बगल में नाला
घर में साला

शुक्रवार, 14 जून 2019

कमबख्त

वो तो कमबख्त है जब आती है।
न नींद आती है न याद आती है।।

सोमवार, 11 मार्च 2019

मेरे मरने पर

मेरे मरने पर मत चराग़ जलाना।
रोशनी दिखानी है तो जीते जी आना।।

रखना है मन का सिकंदर बना रखो।
विभीषण बन, मत घात लगाना।।

आना तो चुपके से विचार की तरह।
चिल्लाते कुत्ते लोमड़ी और सियार है।।

मेरे हिस्से का सूरज संभालकर रखना।
तक़दीर में हमारे अँधेरा बहुत है।।

जाना ईश्वर की तरह, कि फिर लौट न पाना।
जान सा क्या जाना, जब है फिर यहीं आना।

गुरुवार, 22 नवंबर 2018

अमर शहीद ठाकुर रणमत सिंह

*अमर *शहीद *ठाकुर *रणमत *सिंह *महानाट्य
ठाकुर रणमत सिंह के द्वारा गुरिल्ला सैनिको, पिंढारियों और अपने साथियों के साथ मिलकर प्रथम स्वतंत्रता से पहले ही अंग्रेजो को छोटे छोटे युद्ध में परास्त कर चुके थे। रणमत सिंह के प्रमुख साथियों में लाल श्यामशाह, रंजीत राय, दलथम्मन सिंह, धीर सिंह, पंजाब सिंह, सहामत अली आदि प्रमुख हैं। 1857 में मेरठ से उठी चिंगारी रीवा से होते हुE झाँसी की तरफ जा रही थी। संग्राम में कूदने का न्यौता मिला। विंध्य के महाराजा रघुराज सिंह जी देव में स्वीकार किया और मिलकर स्वतन्त्रता संग्राम में आहूति देने का वचन दिया। बघेलखण्ड में अपने सबसे विश्वासपात्र ठाकुर रणमत सिंह को स्वतन्त्रता का क्रांतिवीर नियुक्त किया। लगातार अंग्रेजों को कई युद्ध में परास्त किया। रणमत सिंह ने स्वतंत्रता के महासमर को बघेलखण्ड में जनक्रांति का रूप दे दिया था। जान सहयोग रणमत सिंह को मिल रहा था। वहीं आकस्मिक हमलों से अनजान अंग्रेजों को अपने सैनिकों से हाथ धोना पद रहा था इस कारण पॉलिटिकल एजेण्ट विलोबी आर्सवान रणमत सिंह से खफा था। रणमत सिंह के सर पर 2000 रूपए का ईनाम घोषित हो गया था। जालसाजी से माहाराज के दीवान के द्वारा रणमत सिंह को रीवा के जालपा मंदिर के तलघर में पकड़वा दिया था और 1860 में उन्हें फाँसी दी गई। परिवार के लोग का मत कुछ दूसरा है। नाटक में रणमत सिंह के रणचातुर्य और बहादुरी की चर्चा सथियों में सदैव रही। आप बघेलखं की भौगोलिक स्थिति एवं परिस्थितियों के अच्छे जानकार थे, जातियों और जनजातियों में आपके बातों को माना जाता था। आपकी बातें साथियों के लिए पत्थर की लकीर थी।

बाजारू रौनक

बाज़ार में रौनक
सोना बिक रहा है इधर
है बिक रही ककड़ी
गद्दा उस तरफ़ बेचा जाता है
यहाँ मिलता है जूता
वहाँ भोजन ले सकते है
उस गली में गोल गप्पे
ये गेहूँ-चावल की छल्लियाँ लगी
टपरे पर पान मिलेगा
कोने के ठेले पर चाय ले लो
इधर कहीं बिकता है पानी
अपने से नहीं आया
उतारा है इसे
उत्तर से दक्षिण उधर पूरब से पश्चिम
हमें खरीदना और बेचना आता है
बाज़ार बिमा कोई हैसियत नहीं हमारी

क्या हम बाज़ारू...?  है हम बाज़ारू।